"अकेलापन की आहट"

 


"अकेलापन की आहट"


तन्हाई मेरी साथी बन गई है,

अब ये आलम अकेलापन सहने लग गई है।

ज़िंदगी की सफ़र में खुद को खो दिया है,

जैसे खोया हुआ साथी फिर से पाने लग गई है।


अकेलापन की रातों में बस ख्वाब रह जाते हैं,

जब दिन आता है, वो सपने टूट जाते हैं।

ज़िंदगी की लड़ाई में ये हौसला बन जाता है,

तन्हाई मेरी साथी बन कर आगे बढ़ जाता है।


दर्द की आँधी में आज भी खड़ी हूँ,

ज़िंदगी की लहरों से लड़ी हूँ।

अब मैंने अकेलापन को अपना बना लिया है,

तन्हाई से दोस्ती की मिठास छड़ा लिया है।


दिल की गहराइयों में छिपी है तन्हाई की आहट,

अब ये ज़िंदगी अकेलापन का संगीत बन गई है।

बस एक आसरा है जो मेरे साथ है,

तन्हाई ने मुझे अकेला नहीं छोड़ा है।


ये तन्हाई की रातें भरी हैं ख्वाबों से,

दिनभर की भीड़ में एक मजबूरी बन गई है।

लेकिन जब मैं अपनी सोचों से मिलता हूँ,

तन्हाई मेरी सच्ची सहेली बन

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