"अकेलेपन की आवाज़" (Akelepan Ki Awaaz)
अकेलेपन की आवाज़
तेरे ख्वाबों की दुनिया में,
दिल का अलम रौशनी खो गया।
ख्वाहिशें तो सदियों तक ज़िंदा रहेंगी,
मगर अब तक़दीर का सफ़र कहाँ खो गया।
हर ख़्वाब टूट जाता है,
हर दिल टूट जाता है।
पर क्या करें,
जब अकेले राहों में,
खुद को ही टूट जाता है।
कुछ लोग तो ज़िन्दगी की तरह होते हैं,
कभी रोशनी देते हैं, कभी अँधेरा देते हैं।
दर्द भरी ज़िंदगी का सफ़र है ये,
कभी हंसते हैं, कभी रोते हैं।
ज़िंदगी का हर एक पल है कितना कठिन,
हर राह देती है नयी चुनौतियाँ।
हंसना चाहिए जब भी गमों में,
क्योंकि ज़िंदगी तो सिर्फ एक मौका है प्यारों का।
मेरी आंखों में आंसू छुपे हैं,
मेरी हंसी के पीछे गम छुपे हैं।
दिल की बात न कह पाएंगे हम,
बस ये उम्मीद है तेरे दिल में अब भी हम छुपे हैं।
मेरी आँखों में न जला देना दिया,
मेरे दिल को भी न दफना देना दिया।
चाहे चला जा मुझे अकेले
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